Varanasi: क्या अंधविश्वास एक हत्या की वजह बन सकता है? वाराणसी के चर्चित राजन हत्याकांड की जांच में जो कहानी सामने आई है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को विश्वास था कि राजन कथित रूप से जादू-टोना करता था और इसी वजह से उनके परिवार पर लगातार संकट आ रहे थे। इसी अंधविश्वास ने धीरे-धीरे बदले की भावना का रूप लिया और अंततः एक सुनियोजित हत्या को जन्म दे दिया।
राजन हत्याकांड में वाराणसी पुलिस (Varanasi) ने महज 24 घंटे के भीतर बड़ा खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और इसके लिए राजन की लगातार रेकी कराई जा रही थी।
जानिए क्यों की हत्या?
अपर पुलिस उपायुक्त (काशी ज़ोन) वैभव बांगर ने मंगलवार को पुलिसलाइन सभागार में खुलासा करते हुए बताया कि सुजीत और कृष्णा ने राजन की गतिविधियों पर नजर रखी, जबकि मुख्य आरोपी विशाल और उसके साथी विकास ने वारदात को अंजाम दिया। हत्या में इस्तेमाल किया गया असलहा मध्य प्रदेश से लाया गया था, जिसके संबंध में पुलिस (Varanasi) आगे की जांच कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि उसे विश्वास था कि राजन जादू-टोना करता था, उसका दावा है कि पिछले तीन से चार वर्षों में उसके परिवार और आसपास हुई कई मौतों के पीछे राजन का हाथ था। इसी अंधविश्वास और बदले की भावना में उन्होंने हत्या की साजिश रची।
पूछताछ में मुख्य आरोपी विशाल ने बताया कि उसके अनुसार राजन जादू-टोना किया करता था जिसकी वजह से उसके परिवार में चार मौतें हो चुकीं हैं. इसी के चलते बदला लेने के लिए मैंने यह हत्या कि साजिश रची। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों (varanasi) को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
Varanasi: ये है पूरा मामला?
दरअसल, बीते सोमवार को वाराणसी (Varanasi) के चौक थाना क्षेत्र स्थित बेनियाबाग की हरिजन बस्ती में घर के बाहर चारपाई पर सो रहे राजन नामक व्यक्ति की दो अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने राजन को कई गोलियां दागी और मौके से दोनों फरार हो गए। गंभीर हालत में राजन को मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
बताया गया कि राजन की दो पत्नियां हैं, जिनमें एक मिर्जापुर के नारायणपुर और दूसरी बेनियाबाग में रहती हैं। 20 जून को उनके बेटे की सगाई होनी थी, जिसमें शामिल होने के लिए वह नारायणपुर से वाराणसी आए थे। हैरानी की बात यह है कि वारदात के समय उनका बेटा बगल में ही सो रहा था, लेकिन उसे गोली चलने की भनक तक नहीं लगी। इसी मामले का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर-अंदर खुलासा किया है।
