प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र Kashi के लिए केंद्र सरकार ने सड़क अवसंरचना के इतिहास की सबसे बड़ी सौगात देते हुए 25,445.96 करोड़ की लागत वाली गंगा एलिवेटेड सिक्स लेन कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड सिक्स लेन कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। दोनों परियोजनाओं की घोषणा के बाद बुधवार को कमिश्नरी सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने इसे काशी के विकास का ऐतिहासिक अध्याय बताया।
उन्होंने आगे कहा कि आगामी 50 साल तक काशी (Kashi) के यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए यह दोनों प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होंगी। काशी के विकास की रफ्तार कम नहीं होगी। कहा कि अब तक देश के किसी भी शहर में सड़क अवसंरचना के लिए इतनी बड़ी परियोजना स्वीकृत नहीं हुई है।
जानिए पहली परियोजना के बारे में
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बताया कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने के बाद जिले में जितनी सड़क परियोजनाओं पर कुल खर्च हुआ, लगभग उतनी ही राशि केवल इन दो नई परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाएं काशी की यातायात व्यवस्था, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने बताया कि 14,447.64 करोड़ की लागत से बनने वाला 46.039 किलोमीटर लंबा गंगा एलिवेटेड सिक्स लेन कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा।
इसमें गंगा पर 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज, 1.32 किलोमीटर लंबा ट्रैवलेटरयुक्त फुट ओवर ब्रिज, रैंप, लूप, सर्विस रोड और आधुनिक शहरी परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे काशी विश्वनाथ धाम, बीएचयू, नमो घाट, रामनगर किला, गंगा घाटों, काशी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट (Kashi) तक पहुंच पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम होगी।
जानिए क्या है दूसरी परियोजना
वहीं 10,998.32 करोड़ की लागत वाला 43.218 किलोमीटर लंबा वरुणा एलिवेटेड सिक्स लेन कॉरिडोर एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड (Kashi) से जोड़ेगा। यह परियोजना शहर के भीतरी हिस्सों के ट्रैफिक को सीधे हाईवे नेटवर्क से जोड़ते हुए जाम की समस्या को काफी हद तक समाप्त करेगी। इसके माध्यम से काशी स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, वाराणसी सिटी स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट और चंदौली क्षेत्र तक तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
मंडलायुक्त ने कहा कि सामान्य दिनों में करीब दो लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आते हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग पांच लाख लोगों का आवागमन शहर में होता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में इन दोनों कॉरिडोर के बनने से शहर की यातायात क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी तथा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास (Kashi) को भी नई गति देंगी। एयरपोर्ट, रेलवे, जलमार्ग और राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होने से पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी की पहचान केवल धार्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय शहरी परिवहन व्यवस्था वाले शहर (Kashi) के रूप में भी स्थापित होगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और विकसित काशी के विजन को साकार करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया।
डाफी टोल प्लाजा से रिंग रोड तीन को जोड़ेगा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर
जीटी रोड स्थित डाफी टोल प्लाजा से संदहा से चंदौली को जोड़ने वाले रिंग को गंगा एलिवेटेड सिक्स लेन कॉरिडोर जोड़ेगा। 14,447.64 करोड़ की लागत वाली महत्वाकांक्षी गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दे दी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत करेगा।
परियोजना में 46.039 किलोमीटर लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर, रैंप, लूप, सर्विस रोड, लिंक रोड तथा आधुनिक फुट ओवर ब्रिज विकसित किए जाएंगे। परियोजना के तहत एनएच-19 को वाराणसी रिंग रोड (Kashi) से गंगा तट के किनारे जोड़ा जाएगा। कुल लागत में 6,037.85 करोड़ सिविल निर्माण तथा 541.11 करोड़ भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे। कॉरिडोर को 80 से 100 किमी प्रति घंटे की गति के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
परियोजना पूरी होने पर प्रभावित क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा, जबकि एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक की यात्रा 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट में पूरी होगी। गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर आईडब्ल्यूटी (इनलैंड वाटरवे) पोर्ट को निर्बाध रूप से जोड़ेगा।
इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान और तेज होगी। कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण एलिवेटेड स्पर बीएचयू लंका और सामने घाट के बीच भी विकसित किया जाएगा, जिससे लंका चौराहे पर वर्षों से बनी रहने वाली भीषण यातायात समस्या में राहत मिलेगी।
साथ ही एनएच-19, बीएचयू-रामनगर मार्ग और एनएच-35 पर ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। केंद्र सरकार के अनुसार यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप चंदौली एसईजेड, चंदौली आकांक्षी जिला तथा छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब को जोड़ते हुए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इससे पर्यटन, तीर्थाटन, व्यापार, माल परिवहन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
20 मिनट में बाबतपुर से Kashi स्टेशन
10,998.32 करोड़ की महत्वाकांक्षी वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी मिल गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पर विकसित करेगा। परियोजना के तहत 43.218 किलोमीटर लंबा 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा।
परियोजना में अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड होगा, जिसमें मेन कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड (Kashi) का निर्माण किया जाएगा। कुल लागत में 4,565.33 करोड़ सिविल निर्माण तथा 934.91 करोड़ भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे। यह कॉरिडोर वाराणसी डीकंजेशन प्लान का प्रमुख हिस्सा होगा। इसके बनने से एनएच-31 पर स्थित बाबतपुर और काशी रेलवे स्टेशन (Kashi) के बीच यात्रा का समय 40 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा। परियोजना को 80 से 100 किमी प्रति घंटे की गति के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिससे शहर में जाम कम होगा।
नई परियोजना से वाराणसी रिंग रोड, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूणार्नंद संस्कृत विश्वविद्यालय, गंगा घाटों तथा चंदौली क्षेत्र तक कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा। केंद्र सरकार का मानना है कि यह आधुनिक एक्सेस-कंट्रोल्ड शहरी परिवहन कॉरिडोर न केवल वाराणसी (Kashi) में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा देगा तथा शहर के लाखों नागरिकों और श्रद्धालुओं के आवागमन को अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाएगा।



