Varanasi की धरती पर भारत और जापान की पुरानी दोस्ती को बुधवार को एक नई पहचान मिली। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने संयुक्त रूप से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को स्मृति चिह्न भेंट किया।

varanasi से दोस्ती के एक नए आयाम बढ़ाया आगे
इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान विश्वनाथ की यह भूमि भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश की धरती है। उन्होंने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी और कहा कि यह स्मृति गलियारा भारत और जापान के सामरिक, सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंध प्रतीक हैं। दोस्ती के एक नए आयाम को आगे बढ़ाने के साथा दो हज़ार एक में आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
उन्होंने कहा था उस समय सीएम के रूप में पहली बार जापान गए थे और तभी से मित्रता शुरू हुई थी। आज गलियारा के उद्घाटन (Varanasi) कर अपने संबंध को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे, तकनीक, परिवहन और आर्थिक विकास में जापान, सबसे भरोसेमंद और प्रमुख साझेदार रहा है। इसमें मुंबई-अहमदाबाद रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन), दिल्ली मेट्रो के अलावा मुंबई मेट्रो, बेंगलुरु मेट्रो, कोलकाता मेट्रो, चेन्नई और अहमदाबाद मेट्रो परियोजनाओं के विकास, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Varanasi) आदि शामिल हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट हो रहा विकसित
अपने संबोधन (Varanasi) में सीएम ने आगे कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के पास एक 500 एकड़ की ‘जापान सिटी’ विकसित की जा रही है। इसके साथ ही, जापानी निवेशकों की सहायता के लिए ‘Invest UP’ में एक समर्पित ‘यामानाशी डेस्क’ भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि यमनासी ग्रीन हाइड्रोजन का पार्टनर है। यूपी सरकार और यामानाशी प्रांत मिलकर उत्तर प्रदेश में क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए एक ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री (Varanasi) ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री के विभिन्न दौरों का जिक्र किया और दोनों देशों के संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने देश के विकास में जापान साथ खड़ा मिला है।जापान की लगभग चौदह सौ कंपनियाँ काम कर रही हैं। जापान के प्रधानमंत्री को पद्म विभूषण से 2021 में सम्मानित किया गया। उन्होंने तुलसी के दोहे के साथ मित्रता की कसौटी पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसे जापान जैसा दोस्त मिला है। उन्होंने ख़ुद के जापान दौरे के अनुभवों के बारे में बताया।यमनासी ग्रीन हाइड्रोजन का पार्टनर है।

2027 में भारत-जापान के संबंध के 75 वर्ष होंगे पूरे
2027 में भारत और जापान के संबंधों के 75 वर्ष पूरा होगा। हमारी संस्कृति का संदेश बशुधैव कुटुम्बकम है।उन्होंने बुद्ध से जुड़े स्थानों जैसे- सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी, संकिसा आदि का उल्लेख करते कहा कि भगवान बुद्ध के आस्था का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि अभी जापान के नागोया में एशियन गेम्स हुए थे, जिसमें भारत के खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए वहाँ के लोगों को उन्होंने धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम को सम्बोधित (Varanasi) करते हुए अकी आबे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेमोरियल गलियारे के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के द्वारा मेरे पति को सम्मान दिया गया।मुझे बहुत खुशी हुई कि जब इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश का इसके लिए सभी को दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया कि पहले बनारस का नाम काशी है। काशी और क्योटो दोनों शहरों का नाम के अक्षर से शुरू होता है और दोनों प्राचीन शहर हैं।

मंदिरों में एक सौ आठ बार बजाई जाती है घंटियाँ
उन्होंने कन्वेंशन सेंटर (Varanasi) के बनवाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ों अबे और प्रधानमंत्री मोदी के कार्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सेंट्रा के बाहरी दीवारों पर एक सौ आठ संख्या में प्रतीकात्मक रुद्राक्ष लगाई गई है। एक सौ आठ संख्या जापान के लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है। दिसंबर महीने के आखिरी दिन सभी जापानी बुद्ध मंदिरों में एक सौ आठ बार घंटियाँ बजाई जाती है और माना जाता है कि सभी मनुष्यों में एक सौ आठ क्लेश/बुराइयां होती हैं।
वहीं उन्होंने पीएम मोदी और अपने पति के भावनात्मक और स्नेहिल संबंधों का जिक्र कर भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि 2015 में मेरे पति काशी आए थे और यहाँ पर मां गंगा की आरती को देखा। मेरी भी दिली ख़्वाहिश थी कि मैं भी बनारस आऊँ और सब कुछ अपने आँखों से देखूँ। आज यह मेरा सपना साकार हुआ।
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बताते चलें कि यह सेंटर खुद भारत-जापान सहयोग की एक महत्वपूर्ण मिसाल है। इसे जापान की सहायता से तैयार किया गया था और 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया था। इस फोटो गैलरी में दिसंबर 2015 की वो तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं, जब शिंजो आबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी आए थे और उन्होंने गंगा आरती में हिस्सा लिया था। गौरतलब हो कि रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर (Varanasi) भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक माना जाता है, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे ने की थी।
