Varanasi: राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय परिसर में बन रहा पंचकर्म हट एवं नेचुरोपैथी सेंटर तैयार हो गया है। करीब पौने पांच एकड़ में विकसित हो रहे इस केंद्र में भगवान शिव के साथ चंद्रमा और डमरू की आकर्षक संरचना लोगों को धार्मिक अनुभूति कराएगी। केंद्र में पंचकर्म और नेचुरोपैथी उपचार के साथ औषधीय पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन भी किया जाएगा।

करीब 9 करोड़ 84 लाख 51 हजार रुपये की लागत से बन रहे इस केंद्र के लिए अब तक 4 करोड़ 92 लाख 25 हजार 500 रुपये कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को जारी किए जा चुके हैं। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना के चलते निर्माण कार्य में कुछ विलंब हुआ था। अब भवन का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और अंतिम चरण के कार्य तेजी से चल रहे हैं। निर्माण शुरू होने के करीब 26 माह बाद केंद्र लगभग तैयार हो गया है।

गठिया, लकवा और सर्वाइकल का होगा उपचार
केंद्र (Varanasi) में गठिया, लकवा, सर्वाइकल, साइटिका समेत विभिन्न रोगों का आयुर्वेदिक पंचकर्म पद्धति से उपचार किया जाएगा। मरीजों और पर्यटकों के लिए सुपर डीलक्स, डीलक्स तथा कॉटेज की सुविधा भी प्रस्तावित है। केंद्र का संचालन राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चौकाघाट से किया जाएगा।

Varanasi: जल्द कराया जाएगा उद्घाटन
आयुष राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि सेंटर का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया गया है। जल्द से जल्द इसका उद्घाटन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र पूर्वांचल के लोगों को आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा (Varanasi) की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विदेशी पर्यटकों को भी मिलेगी चिकित्सा सुविधा
वाराणसी (Varanasi) पर्यटन की नगरी होने के साथ आयुर्वेद और पंचकर्म की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद एवं पंचकर्म की ख्याति देश-विदेश तक पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र को विकसित किया जा रहा है। यहां वाराणसी भ्रमण पर आने वाले विदेशी पर्यटकों को पर्यटन के साथ चिकित्सीय सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
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केंद्र परिसर में सर्पगंधा, अश्वगंधा, शालपर्णी, हरिद्रा, अर्क, स्नुही, अपामार्ग, शतावरी, भूम्यामलकी, वचा, घृतकुमारी, नीम, अर्जुन, बिल्व, आंवला, शिरीष, प्लक्ष, वट, उदुम्बर, अश्वत्थ, करंज, जामुन, कुटज, शरपुंखा, अस्थिश्रंखला, गुडूची, तुलसी, कालमेघ और भृंगराज समेत विभिन्न औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इससे परिसर (Varanasi) उपचार के साथ औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण का भी केंद्र बनेगा।

