Sonbhadra: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त अधिकारी से 2 करोड़ 36 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में सोनभद्र पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने मामले के मुख्य अभियुक्त समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह सामने आई कि ठगी की पूरी साजिश में मुख्य आरोपी ने अपनी होने वाली पत्नी और उसकी मां (सास) को भी साथ शामिल किया था।
आरोपियों ने हायर ज्यूडिशियरी और शासन के अधिकारियों का भय दिखाकर सेवानिवृत्त अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट किया और अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लिए। पुलिस (Sonbhadra) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम में से 75 लाख रुपये होल्ड/फ्रीज करा दिए। वहीं ठगी के पैसों से खरीदी गई टाटा हैरियर कार, 2.10 लाख रुपये नकद, पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन और इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता का फर्जी आईडी कार्ड बरामद किया गया है। पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने घटना का खुलासा किया है।
बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला करोड़ों की ठगी का राज
मामला 22 सितंबर 2026 का है। भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक ने साइबर क्राइम पुलिस थाना सोनभद्र (Sonbhadra) को सूचना दी कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी लगातार किसी व्यक्ति के बताए खातों में रुपये ट्रांसफर कर रहा है। वह काफी धनराशि पहले ही भेज चुका था, लेकिन पूछताछ में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था। उसकी स्थिति से बैंक अधिकारियों को आशंका हुई कि वह किसी के दबाव में धनराशि ट्रांसफर कर रहा है।
सूचना मिलते ही साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी टीम के साथ बैंक पहुंचे, लेकिन तब तक सेवानिवृत्त अधिकारी वहां से जा चुके थे। पुलिस ने उनकी तलाश (Sonbhadra) शुरू की और मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा को दी। एसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन ऋषभ रुणवाल को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट और शासन का डर दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त अधिकारी को हायर ज्यूडिशियरी और शासन के अधिकारियों का भय दिखाया था। आरोपियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट किए जाने का विश्वास दिलाते हुए लगातार फोन पर निगरानी में रखा और अलग-अलग बैंक खातों में करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
ठगी के बाद भी आरोपी लगातार और रकम की मांग कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क कर पीड़ित के मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटाई और तत्काल खातों पर रोक लगवाई। पुलिस (Sonbhadra) की कार्रवाई से ठगी की रकम में से 75 लाख रुपये होल्ड/फ्रीज कराने में सफलता मिली।
Sonbhadra: एआई और डीपफेक से बनाया जाल
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह द्वारा AI तकनीक का दुरुपयोग कर डीपफेक इमेज और फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इन्हीं के जरिए पीड़ित को ब्लैकमेल कर डराया-धमकाया गया और रकम वसूली गई। इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम (Sonbhadra) ने मुख्य आरोपी अरुण कुमार दूबे को प्रयागराज के ओमेक्स अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया।उसकी निशानदेही पर ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार और 2.10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
होने वाली पत्नी और सास के साथ मिलकर रची साजिश
पुलिस के अनुसार इस साइबर ठगी की वारदात में मुख्य आरोपी अरुण कुमार दूबे ने अपनी होने वाली पत्नी तेजल और उसकी मां प्रियंका मिश्रा के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया। दोनों महिलाओं को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है या नहीं।
पांच मोबाइल और फर्जी अधिवक्ता आईडी बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2.10 लाख रुपये नकद, इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता का फर्जी आईडी कार्ड तथा ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार बरामद की है। बरामद सामग्री की जांच के आधार पर पुलिस साइबर ठगी के नेटवर्क की अन्य कड़ियों को खंगाल रही है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में अरुण कुमार दूबे पुत्र हर्ष प्रसाद दूबे निवासी विजयपुर कलना, चुनार, मिर्जापुर, प्रियंका मिश्रा पत्नी स्व. संतोष कुमार मिश्रा निवासी घोड़गल्ली, श्रीवर्धन, रायगढ़, महाराष्ट्र और तेजल पुत्री स्व. संतोष कुमार मिश्रा निवासी घोड़गल्ली, श्रीवर्धन, रायगढ़, महाराष्ट्र शामिल हैं।
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पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आरोपियों (Sonbhadra) की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में तीन पुलिस टीमों का गठन किया गया था। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की निगरानी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई।

