Varanasi: पितृपक्ष के अवसर पर काशी में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में कोरिया से आए एक यात्री ने अपने पितरों की शांति और आत्मिक कल्याण की कामना से काशी में विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया। काशी भ्रमण के लिए पहुंचे यात्री ने भारतीय धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति अपनी आस्था और रुचि व्यक्त करते हुए अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा कर संकल्प लिया।
पूरे कार्यक्रम का आयोजन पुरोहित राहुल पांडेय के नेतृत्व में कराया गया। पितृपक्ष की धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप यात्री ने पितरों (Varanasi) का स्मरण करते हुए पूजन-अर्चन किया और उनकी शांति की कामना की। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान के साथ विभिन्न कर्मकांड संपन्न कराए गए। पुरोहित राहुल पांडेय ने उन्हें भारतीय परंपरा में पितृपक्ष और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा के महत्व की जानकारी भी दी।
Varanasi: अच्छी लगती है भारतीय परंपरा
कोरिया से आए यात्री ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि भारतीय परंपराएं और यहां की धार्मिक संस्कृति उन्हें काफी अच्छी लगती हैं। काशी (Varanasi) के बारे में उन्होंने पहले से काफी कुछ सुना था और यहां आकर धार्मिक स्थलों के दर्शन करने की इच्छा थी। काशी भ्रमण के दौरान जब उन्हें पितृपक्ष और पूर्वजों के लिए किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने पितरों की शांति के लिए पूजन-अर्चन करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पूर्वजों के प्रति जिस तरह श्रद्धा और सम्मान का भाव देखने को मिलता है, वह उन्हें काफी प्रभावित करता है। काशी (Varanasi) आकर अपने पूर्वजों के लिए पूजन करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि यहां की धार्मिक परंपराओं, वातावरण और आध्यात्मिकता को करीब से महसूस करने का अवसर मिला।
पितृ पक्ष में काशी पहुँचते हैं काफी विदेश यात्री
काशी (Varanasi) में पितृपक्ष के दौरान होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का अपना विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पूर्वजों का स्मरण, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म करने से पितरों की आत्मा की शांति के लिए पुण्य प्राप्त होता है। इसी धार्मिक आस्था के चलते देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।
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विदेशी यात्री का पितरों की शांति के लिए काशी में पूजन करना यह भी दर्शाता है कि भारतीय धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कृति के प्रति दुनिया के विभिन्न देशों के लोगों में रुचि बढ़ रही है। काशी (Varanasi) की प्राचीन परंपराएं, मंदिर, घाट और धार्मिक अनुष्ठान विदेशी यात्रियों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। पितृपक्ष के दौरान कोरिया से आए यात्री द्वारा अपने पूर्वजों के लिए किया गया पूजन इसी आध्यात्मिक आकर्षण का उदाहरण रहा।

