Varanasi: अंग्रेजों के नीतियों के खिलाफ काशी में शुरू हुए महामुर्ख सम्मलेन की परंपरा को आगे बढाते हुए एक बार फिर से इसका आयोजन 1 अप्रैल को होने जा रहा है। जहाँ एक ओर अंग्रेजों ने हिंदू नव वर्ष के महत्त्व को कम करने के लिए अप्रैल फूल डे की अवधारणा को बढ़ावा दिया। इसी के विरोध में काशी में महामूर्ख मेले का आयोजन होता है।

काशी, जो कि अपने आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक विरासत और अवधारणाओं को लेकर विश्व विख्यात है, यहाँ पिछले 57 वर्षों से एक सम्मलेन (Varanasi) का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मलेन का नाम है महामूर्ख सम्मलेन। यह सम्मलेन भले ही हास्य और व्यंगात्मक प्रारूप में आयोजित किया जाता है लेकिन इसका उद्देश्य सरासर अंग्रेजों के नीतियों का बहिष्कार करना है। इस बार इसका 58वां संस्करण है, जो काशी के राजेंद्र प्रसाद घाट पर 1 अप्रैल को एंटी फ्रॉड दे के रूप में मनाया जायेगा।
Varanasi: प्रस्तुतियों का सजेगा अद्वितीय मंच
साहित्यकारों द्वारा अपने-अपने रचनाओं की प्रस्तुति देकर हास्य, कला, जनजागरण का अद्वितीय मंच सजाया जाएगा। इसमें सरदार प्रताप फौजदार विशिष्ट कवि के रूप में सम्मिलित होंगे। इसके अलावा खंडवा से अकबर ताज, रीवा से कामता माखन आयर लखनऊ से धर्मराज उपाध्याय जैसे प्रतिष्ठित कवियों का जमावड़ा भी इसमें नजर आएगा। वहीं इस महामूर्ख सम्मलेन का संचालन दमदार बनारसी करेंगे। इस बार इस सम्मलेन (Varanasi) का विषय ‘विश्व युद्ध’ होगा। साथ ही साइबर फ्रॉड एवं अपराध जागरूकता जैसे विषय भी लोगों का ध्यान केन्द्रित किया जायेगा।
काशी में आयोजित होने जा रहे महामूर्ख सम्मलेन को लेकर दमदार बनारसी ने बताया कि महामूर्ख मेले का आयोजन शनिवार गोष्ठी की ओर से पिछले 57 वर्षों से आयोजित की जा रही है। अंग्रेजों के हुकूमत के समय जब हिन्दुओं के नववर्ष पर व्यंग किया गया। इसका विरोध करते हुए काशी में महामूर्ख सम्मलेन (Varanasi) की शुरुआत हुई। जो हर साल चली आ रही है।

उन्होंने आगे बताया कि इसमें एक से बढ़कर एक कलाकार शामिल होंगे और ये हास्य, व्यंग का कार्यक्रम हमें हमेशा यह याद दिलाता है कि हमें हमेशा अपनी आवाज जो बुलंद रखना चाहिए। इस कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता का भी ध्यान रखा गया है क्योंकि हम सभी एक है और एक समाज का हिस्सा है।

