BHU के सामाजिक विज्ञान संकाय की सेमेस्टर परीक्षा में पूछे गए तथाकथित “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” से जुड़े प्रश्न को लेकर बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिषद की BHU इकाई ने इतिहास विभाग का घेराव कर इस प्रश्न को वैचारिक रूप से प्रेरित बताते हुए इसे शिक्षा की मूल भावना के विपरीत करार दिया।

प्रदर्शन के बाद एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की। परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में अकादमिक विमर्श की आड़ में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए उचित नहीं है।
BHU परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल
परिषद का कहना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को एकांगी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास लंबे समय से कुछ वर्गों द्वारा किया जाता रहा है। एबीवीपी ने “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” जैसी शब्दावली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह न केवल वैचारिक रूप से विवादित है, बल्कि इसका कोई स्पष्ट एवं सर्वमान्य अकादमिक आधार भी नहीं है। परिषद के अनुसार, इस प्रकार के प्रश्न छात्रों पर एक विशेष विचारधारा थोपने का प्रयास प्रतीत होते हैं।

अभाविप BHU इकाई के अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्था में वैचारिक रूप से प्रेरित प्रश्न पूछना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और निष्पक्ष चिंतन का केंद्र होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा के प्रचार का माध्यम। पल्लव सुमन ने आरोप लगाया कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को लगातार अपराधबोध के दायरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे अब छात्र समाज स्वीकार नहीं करेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ABVP की चेतावनी
वहीं एबीवीपी BHU इकाई के इकाई सहमंत्री विकास कुमार ने कहा कि BHU की पहचान भारतीयता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों से जुड़ी रही है। परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्न पूछकर छात्रों के बीच भ्रम और वैचारिक विभाजन उत्पन्न करने की कोशिश की गई है। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करे तथा भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण में अकादमिक संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और चेतावनी दी कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो परिषद आगे और बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि संबंधित प्रश्न की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी प्रकार के वैचारिक पूर्वाग्रह से प्रेरित प्रश्न परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा न बनें।
