Varanasi: आगामी बकरीद से ठीक पहले शहर के बेनिया बाग पार्क में लगने वाली प्रसिद्ध बकरा मंडी पर प्रशासन द्वारा ताला लगाए जाने के बाद व्यापारियों और पशु विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए इसे रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार बताया है।
बताया जाता है कि बेनिया बाग पार्क में वर्षों से बकरा ईद के अवसर पर अस्थायी बकरा मंडी लगती रही है, जहां वाराणसी समेत आसपास के कई जनपदों से व्यापारी बकरों को बिक्री के लिए लेकर पहुंचते हैं। मंडी में प्रतिदिन लगभग एक हजार से डेढ़ हजार तक बकरों की आमद होती है। यहां खरीदारी के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लोग पहुंचते हैं।
प्रशासन के अचनक मंडी पहुंचने से हड़कंप
सोमवार को अचानक प्रशासनिक टीम मंडी (Varanasi) पहुंची और स्थल को खाली कराने का निर्देश देते हुए मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। प्रशासन की कार्रवाई के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। व्यापारी और पशुपालक अपने बकरों के साथ इधर-उधर भटकते नजर आए।
मंडी के मुख्य संचालक साजिद ने बताया कि प्रशासन (Varanasi) की ओर से पहले किसी प्रकार की लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी गई थी। अचानक अधिकारी पहुंचे और आधे घंटे के भीतर मंडी खाली करने का आदेश दे दिया गया। उन्होंने कहा कि त्योहार में महज तीन दिन शेष हैं, ऐसे समय में मंडी बंद होने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
मंडी बंद होने से व्यापारी दब जाएंगे कर्ज तले
साजिद ने कहा कि इस मंडी से दर्जनों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। दूर-दराज से आए व्यापारियों ने उधार और कर्ज लेकर बकरे खरीदे हैं ताकि त्योहार पर बिक्री कर परिवार का भरण-पोषण कर सकें। यदि इस समय मंडी बंद कर दी गई तो व्यापारी कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। मंडी में पहुंचे कई पशु व्यापारियों (Varanasi) ने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम तीन दिनों की मोहलत दी जाए ताकि वे अपने बकरों की बिक्री कर सकें। व्यापारियों का कहना था कि अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
घटना के बाद मंडी संचालक (Varanasi) साजिद प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता करने पहुंचे। देर शाम तक व्यापारी प्रशासन के निर्णय में राहत मिलने की उम्मीद लगाए रहे। वहीं मंडी में पहुंचे खरीदारों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को मंडी हटानी थी तो पहले से सूचना देकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि व्यापारियों और खरीदारों दोनों को असुविधा न हो। फिलहाल व्यापारियों की निगाहें जिला प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।
