Varanasi: साइबर ठग अब अस्पतालों में जांच और इलाज की ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र में सामने आया है, जहां मरीज की जांच बुकिंग कराने के बहाने साइबर अपराधियों ने एक व्यक्ति के बैंक खाते से 2 लाख 67 हजार रुपये उड़ा दिए। पीड़ित की शिकायत पर चौबेपुर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही साइबर सेल की भी मदद ली जा रही है।
जानकारी के अनुसार, चौबेपुर थाना क्षेत्र (Varanasi) के चिरईगांव रुस्तमपुर निवासी जोखन सिंह अपने एक मरीज की जांच कराने के लिए एपेक्स हॉस्पिटल का संपर्क नंबर गूगल पर खोज रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने अस्पताल का आधिकारिक नंबर समझकर कॉल कर दिया।
एक लिंक भेजा और क्लिक कर प्रक्रिया पूरी करने को कहा
फोन रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल का प्रतिनिधि बताते हुए जांच की ऑनलाइन बुकिंग कराने की बात कही। उसने जोखन सिंह से एक ऑनलाइन फॉर्म भरने और बुकिंग शुल्क के रूप में मात्र पांच रुपये जमा करने के लिए कहा। इसके बाद उनके मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया और उस पर क्लिक कर प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया।
पीड़ित के अनुसार, इसी दौरान उनका मोबाइल फोन अचानक खराब हो गया, जिसे ठीक होने में करीब दो दिन लग गए। जब मोबाइल चालू हुआ तो उन्हें पता चला कि 12 जून को उनके बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 2 लाख 67 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। खाते (Varanasi) से इतनी बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने तत्काल चौबेपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में साइबर ठगी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Varanasi: आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास
चौबेपुर थाना प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल नंबर और भेजे गए लिंक की तकनीकी जांच (Varanasi) कराई जा रही है। आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस (Varanasi) ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अस्पताल, संस्था या सेवा का संपर्क नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से ही प्राप्त करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने या ऑनलाइन भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन अवश्य करें, ताकि इस प्रकार की साइबर ठगी से बचा जा सके।

