Kashi में सोमवार को संतों, बटुकों और गोसेवकों ने गो संरक्षण और गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। करीब 150 संत और बटुक शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम से प्रार्थना यात्रा निकालते हुए बुलडोजर पर 5.5 लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह गोपूजन और शंखनाद के साथ हुई। इसके बाद शिवपुर मिनी स्टेडियम से निकली यात्रा लगभग 2.4 किलोमीटर का सफर तय कर डीएम कार्यालय (Kashi) पहुंची। बुलडोजर पर रखे ज्ञापन के साथ पूजन सामग्री भी मौजूद थी, जबकि यात्रा में गोमाता को भी शामिल किया गया। रास्ते भर श्रद्धालु और संत गो संरक्षण के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़े।

एक घंटे तक भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण
सुबह करीब 10 बजे डीएम कार्यालय (Kashi) पहुंचने के बाद संत और बटुक परिसर में बैठ गए। करीब एक घंटे तक भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। बाद में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) मौके पर पहुंचे और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन संतों से प्राप्त किया।

देशभर में चल रहा है हस्ताक्षर अभियान
यात्रा में शामिल जगतगुरु बालकदास ने बताया कि ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत पिछले छह महीनों से देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब तक करोड़ों नागरिक इस अभियान से जुड़ चुके हैं और विभिन्न जिलों के माध्यम से केंद्र सरकार तक ज्ञापन भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान (Kashi) का उद्देश्य गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और गोवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी केंद्रीय कानून बनवाना है।
Kashi: सरकार के सामने रखीं 30 से अधिक मांगें
संतों ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’, ‘राष्ट्रीय धरोहर’ या ‘राष्ट्रीय पहचान’ का दर्जा दिया जाए।
- पूरे देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक समान केंद्रीय कानून बनाया जाए।
- गोतस्करी और गोहत्या के मामलों में दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया जाए।
- गोवंश के संरक्षण और प्रबंधन के लिए केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना की जाए।
- गोशालाओं को मनरेगा जैसी योजनाओं से जोड़ा जाए।
- चारा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।
- सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रसाद में देशी गाय के दूध, दही और घी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।

संतों के अनुसार, अभियान के पहले चरण में देशभर की हजारों तहसीलों से करोड़ों नागरिकों के हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सरकार को भेजा गया था। मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं होने के बाद अब दूसरे चरण (Kashi) में और अधिक हस्ताक्षरों के साथ दोबारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजा जा रहा है।
वाराणसी से भी करीब 5.5 लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को प्रेषित किया गया है।
