प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने वाराणसी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बाबा को बेलपत्र अर्पित किए। इस दौरान सतुआ बाबा भी उनके साथ मौजूद रहे। मंदिर के आर्चक श्रीकांत मिश्र ने उन्हें पूजन कराया।
दर्शन के बाद प्रदीप मिश्रा भारत माता मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने ‘घर-घर तिरंगा’ अभियान का संदेश दिया और लोगों के साथ भारत माता की जय के नारे लगाए। उन्होंने लोगों से देश के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने की अपील की।
काशी में बढ़ती भीड़ पर बोले प्रदीप मिश्रा
पंडित प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने काशी में बढ़ती भीड़ और यातायात व्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने कहा कि काशी मूल रूप से शांति की नगरी रही है, लेकिन अब बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने से शहर का स्वरूप बदल रहा है।
उन्होंने कहा कि भीड़ बढ़ने के कारण सड़कों पर शोर और कई जगहों पर जाम की स्थिति बनती है। उनके मुताबिक पहले काशी में इस तरह की भीड़ और यातायात की समस्या कम देखने को मिलती थी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास का किया जिक्र
प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद काशी की सनातन परंपरा आज भी कायम है।
उन्होंने कहा कि काशी की गलियों और मकानों के नीचे भी सनातन परंपरा और शिव आराधना से जुड़े प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी में खुदाई करने पर कई जगह शिवलिंग मिलने की मान्यता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने श्रद्धालुओं से बेलपत्र का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसे पैरों से कुचलना या इसका अपमान नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाते समय यदि रास्ते में बेलपत्र गिरा हुआ दिखाई दे तो उसे उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। उनका कहना था कि भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र का सम्मान करना भी श्रद्धा और भक्ति का हिस्सा है।

