Ayodhya के राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा अनियमितता मामले ने शुक्रवार को बड़ा मोड़ ले लिया। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मामले में पहली एफआईआर दर्ज हो चुकी है, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार जांच को आगे बढ़ा रही है। चंपत राय पर पिछले कई दिनों से विपक्ष लगातार हमलावर था और इस्तीफे की मांग कर रहा था।
राम मंदिर (Ayodhya) में कथित चढ़ावा चोरी और अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़ दिए। दोनों के इस्तीफे ऐसे समय आए हैं जब एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पहली एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
सीएम योगी ने दोहराई जीरो टॉलरेंस की नीति
मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शुक्रवार को देवरिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है और इसकी मर्यादा पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी और अब रिपोर्ट आने के साथ कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
आठ आरोपी गिरफ्तार, जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
चढ़ावा चोरी मामले (Ayodhya) में गुरुवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद शुक्रवार को चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अयोध्या पुलिस सभी नामजद आरोपियों के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार फिलहाल जांच वादी की शिकायत के आधार पर आगे बढ़ रही है। यदि जांच के दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका सामने आती है तो उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
पुलिस अभी एसआईटी की पूरी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच में और नाम जुड़ सकते हैं। सभी आरोपियों (Ayodhya) के बयानों का आपस में मिलान किया जा रहा है और बैंक खातों की भी जांच होगी ताकि पूरे मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों का कहना है कि नए तथ्य सामने आने के साथ जांच का दायरा भी बढ़ता जाएगा।
किन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर
ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष कुमार यादव और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार एसआईटी ने 23 जून को सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित कई आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
Ayodhya: कैसे शुरू हुई पूरी जांच
राम मंदिर (Ayodhya) में कथित दान और चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने स्वयं विशेष जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया। इस जांच दल में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया। जांच दल ने प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई।
इस पूरे विवाद (Ayodhya) को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को एक समाचार का हवाला देते हुए प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया और विपक्ष लगातार ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करता रहा।
चंपत राय पर लगातार हमलावर रहा विपक्ष
मामले के सार्वजनिक होने के बाद से ही चंपत राय विपक्ष के निशाने पर रहे। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि चंदा चोरी के मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण कार्य, जमीन खरीद और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई (Ayodhya) क्यों नहीं हुई।
राम मंदिर (Ayodhya) देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले में दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारियां और दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे ने पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कार्रवाई शुरू हुई है, बल्कि यह है कि क्या जांच अंतिम निष्कर्ष तक पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगी। क्योंकि आस्था से जुड़े मामलों में केवल न्याय होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई देना भी उतना ही आवश्यक होता है।
