सुप्रीम कोर्ट (SC) में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या अब 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। इससे जुड़ा विधेयक सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया। शोर-शराबे के कारण सदन में इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हंगामे की वजह से कार्यवाही कई बार बाधित हुई। इसी बीच न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक सदन में रखा गया (SC), लेकिन चर्चा की स्थिति नहीं बन सकी।
दोपहर दो बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक (SC) को विचार और पारित कराने के लिए पेश किया। उस समय भी विपक्षी सांसद राम मंदिर के धन में कथित गड़बड़ी और दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी करते रहे।
पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटकर सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग देने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। आखिरकार लगातार हंगामे के बीच विधेयक (SC) को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई।
लंबित मामलों को देखने के लिए ऐसा किया गया: कानून मंत्री
विधेयक पेश करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इसी विषय पर मई में अध्यादेश ला चुकी थी और संशोधित स्वीकृत संख्या के आधार पर सुप्रीम कोर्ट (sc) में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है।
बढाई गई sc के जजों कि संख्या
इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट (SC) के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई थी। तब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।
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मेघवाल ने सदन को यह भी बताया कि आजादी के बाद 1956 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट (sc) में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 11 की गई थी। इसके बाद लंबित मामलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए समय-समय पर यह संख्या बढ़ाई जाती रही है। अब कुल स्वीकृत संख्या 38 कर दी गई है।

