Varanasi: शहर की सबसे चर्चित और संवेदनशील परियोजनाओं में शामिल दालमंडी चौड़ीकरण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को जुमे की नमाज खत्म होते ही प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ दालमंडी पहुंचा और सात अतिजर्जर घोषित मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। इलाके में अचानक बढ़ी हलचल ने लोगों को चौंका दिया, क्योंकि एक दिन पहले ही प्रस्तावित कार्रवाई टाल दी गई थी। अब प्रशासन साफ संकेत दे चुका है कि दालमंडी प्रोजेक्ट को हर हाल में तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।
जर्जर भवनों पर प्रशासन की सख्ती
नगर निगम ने दालमंडी क्षेत्र के 22 भवनों को अति जर्जर घोषित करते हुए पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। इन्हीं भवनों में से सात पर शुक्रवार को जेसीबी और मजदूरों की टीम के साथ कार्रवाई शुरू हुई। इलाके में किसी तरह के विरोध या तनाव की आशंका को देखते हुए कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे और ध्वस्तीकरण की निगरानी करते रहे।
पीडब्ल्यूडी (Varanasi) के एक्सईएन के के सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में दालमंडी चौड़ीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह तक फेंसिंग का कार्य पूरा कर परियोजना कार्यदाई संस्था को सौंपने की तैयारी है। इसी वजह से अब ध्वस्तीकरण अभियान को तेज कर दिया गया है।
60 मकान पहले ही हो चुके जमींदोज
दालमंडी (Varanasi) में अब तक 60 मकानों को पूरी तरह गिराया जा चुका है, जबकि 45 मकानों में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन के अनुसार कुल 181 भवन इस परियोजना की जद में आए हैं और लगभग 60 प्रतिशत संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इनमें दो वक्फ संपत्तियां भी शामिल हैं, जिन पर भी तोड़फोड़ का काम चल रहा है।
अधिकारियों का दावा है कि अधिकतर मकान मालिक मुआवजे और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। लक्ष्य यह रखा गया है कि मई के अंतिम सप्ताह तक अधिकतर ध्वस्तीकरण का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि आगे सड़क निर्माण की प्रक्रिया बिना रुकावट शुरू हो सके।
पहले भी उठ चुके हैं विरोध के स्वर
दालमंडी में यह पहली बार नहीं है जब जर्जर भवनों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले फरवरी में भी पीडब्ल्यूडी ने एक ही दिन में 23 मकानों को गिराया था। नगर निगम ने 30 जनवरी को नोटिस जारी कर भवन खाली करने के लिए तीन दिन का समय दिया था और 9 फरवरी को कार्रवाई (Varanasi) कर दी गई थी। उस दौरान कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उनके मकान जर्जर नहीं थे, फिर भी उन्हें तोड़ दिया गया।
लोगों का कहना था कि उन्हें पर्याप्त समय और स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। अचानक भवनों को खतरनाक घोषित कर ध्वस्तीकरण (Varanasi) शुरू कर देना उनके लिए बड़ा झटका था। यही कारण है कि हर नई कार्रवाई के साथ इलाके में बेचैनी और अविश्वास का माहौल भी दिखाई देता है।
क्या है दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना
वाराणसी की ऐतिहासिक और अत्यंत संकरी दालमंडी (Varanasi) गली को मॉडल सड़क के रूप में विकसित करने की योजना केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री ने अपने 51वें काशी दौरे के दौरान इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।
परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 215.88 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 186 भवन और दुकान स्वामियों को लगभग 191 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं। पीडब्ल्यूडी ने भवनों की नपाई, मूल्यांकन और रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक 60 से अधिक मकानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है।
60 फुट चौड़ी होगी नई दालमंडी
नई सड़क से चौक थाने तक करीब 650 मीटर लंबी दालमंडी गली को 60 फुट चौड़ा किया जाएगा। इसमें 30 फुट चौड़ी मुख्य सड़क और दोनों ओर 15-15 फुट चौड़ी पटरी बनाई जाएगी। पूरी परियोजना (Varanasi) को आधुनिक शहरी ढांचे के अनुरूप तैयार करने की योजना है। सड़क के नीचे बिजली, पानी और सीवर की लाइनें अंडरग्राउंड की जाएंगी। वर्षों से उलझे तारों का जाल हटाया जाएगा और पूरे क्षेत्र को व्यवस्थित स्वरूप देने की तैयारी है। प्रशासन (Varanasi) का दावा है कि चौड़ी सड़क बनने से दालमंडी में जाम, भीड़ और अव्यवस्था की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
इस परियोजना में छह मस्जिदें भी प्रभावित क्षेत्र में आ रही हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने पूरे इलाके का विस्तृत डेटा तैयार किया है और उसी के आधार पर मुआवजे का आकलन किया गया है। यही वजह है कि परियोजना केवल इंजीनियरिंग या सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि यह सामाजिक, धार्मिक और भावनात्मक पहलुओं से भी जुड़ गई है। दालमंडी (Varanasi) आज सिर्फ एक सड़क चौड़ीकरण परियोजना नहीं रह गई है। यह विकास और विरासत, प्रशासनिक सख्ती और स्थानीय असुरक्षा, आधुनिक शहर और पुरानी बस्तियों के बीच चल रहे संघर्ष की तस्वीर बन चुकी है।
