Bareka में करीब 46 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा इस वर्ष पहली बार अलग रूप में नजर आएगी। दशहरे के अवसर पर बरेका की रंगशाला में होने वाली पारंपरिक रामलीला इस बार आयोजित नहीं होगी। इसके स्थान पर 11 से 19 अक्टूबर तक संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। शाम सात बजे से साध्वी प्रियंका शास्त्री श्रद्धालुओं को संगीतमय शैली में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा से परिचित कराएंगी। हालांकि विजयादशमी के दिन केंद्रीय खेल मैदान में होने वाला बरेका का भव्य रूपक पहले की तरह आयोजित किया जाएगा।
Bareka में दशहरे के अवसर पर रामलीला की परंपरा लंबे समय से लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ी रही है। रंगशाला में दशहरे से पहले नारद मोह से लेकर मेघनाद वध और सुलोचना विलाप तक के विभिन्न प्रसंग रामलीला के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। हर शाम होने वाले इन मंचनों को देखने के लिए बरेका कर्मचारी, उनके परिवार और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचते रहे हैं। रामलीला के दौरान रंगशाला का वातावरण धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में बदल जाता था।
Bareka: 1980 से जारी है मंचन की परंपरा
Bareka कर्मचारियों के अनुसार रंगशाला में वर्ष 1980 से रामलीला का मंचन अलग-अलग स्थानों से आने वाले कलाकारों और टीमों द्वारा किया जाता रहा है। इससे पहले बरेका के कर्मचारी स्वयं रामलीला का आयोजन करते थे। समय के साथ बाहर से कलाकारों और रामलीला मंडलियों को बुलाकर मंचन की परंपरा आगे बढ़ी। चार दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा बरेका की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
रामलीला के बाद विजयादशमी पर केंद्रीय खेल मैदान (Bareka) में करीब ढाई घंटे का भव्य रूपक प्रस्तुत किया जाता है। इसमें भगवान श्रीराम के वनगमन से लेकर रावण वध तक की पूरी कथा को मंचित किया जाता है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में कलाकार हिस्सा लेते हैं और आकर्षक मंच सज्जा, संवाद, संगीत तथा युद्ध प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। बरेका ही नहीं, आसपास के जिलों से भी हजारों लोग इस रूपक को देखने पहुंचते हैं।
रामलीला की जगह इस बार रामकथा
इस वर्ष रंगशाला में पारंपरिक रामलीला के स्थान पर संगीतमय श्रीराम कथा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 11 से 19 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम सात बजे से साध्वी प्रियंका शास्त्री कथा का वाचन करेंगी। आयोजन के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को कथा, भजन और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
विजयादशमी समिति के महामंत्री अनूप सिंह वत्स ने बताया कि रामलीला और रामकथा दोनों ही प्रभु श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़ी हैं। लोगों की मांग और पसंद को देखते हुए इस वर्ष रामकथा का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रामलीला की परंपरा को स्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष यदि उपयुक्त कलाकार या अच्छी रामलीला टीम उपलब्ध होती है तो रंगशाला में फिर से रामलीला का मंचन कराया जा सकता है। ऐसे में बरेका की चार दशक पुरानी रामलीला परंपरा के पूरी तरह समाप्त होने के बजाय इस वर्ष इसमें अस्थायी बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
केंद्रीय खेल मैदान का रूपक रहेगा आकर्षण
रामलीला के आयोजन में बदलाव के बावजूद विजयादशमी का मुख्य आकर्षण बरकरार रहेगा। केंद्रीय खेल मैदान में होने वाला भव्य रूपक इस बार भी आयोजित किया जाएगा। राम वनगमन से लेकर रावण वध तक की कथा को करीब ढाई घंटे में मंचित किया जाएगा। इस आयोजन में हर वर्ष बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं। बरेका (Bareka) के कर्मचारी और उनके परिवार ही नहीं, वाराणसी तथा आसपास के जिलों से भी लोग दशहरे के इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं।
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इस बार रंगशाला में रामलीला की जगह श्रीराम कथा और विजयादशमी पर केंद्रीय खेल मैदान (Bareka) में भव्य रूपक का आयोजन बरेका के दशहरा उत्सव को नया स्वरूप देगा। वहीं, चार दशक से अधिक समय से रामलीला देखते आ रहे बरेका कर्मचारियों और उनके परिवारों में अगले वर्ष फिर से पारंपरिक रामलीला मंचन शुरू होने की उम्मीद बनी हुई है।

