राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में चल रही हलचल के बीच समाजवादी पार्टी (SP) ने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने का संकेत दे दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक पोस्ट ने तस्वीर साफ कर दी है। इसके साथ ही सपा के दो और भाजपा के आठ उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया है।
SP ने लगाया तीसरे उम्मीदवार पर विराम
समाजवादी पार्टी (SP) की ओर से मंगलवार, 6 अक्टूबर को तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के नाम की घोषणा किए जाने और विधान भवन पहुंचकर नामांकन दाखिल करने की चर्चा थी। नामांकन का आज आखिरी दिन भी है। लेकिन इससे पहले अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर साफ संकेत दे दिया कि पार्टी अब राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी। उन्होंने लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” अखिलेश के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
दो उम्मीदवार पहले ही मैदान में
सपा (SP) इससे पहले दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। इनमें पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं, जो छठी बार राज्यसभा पहुंचने की तैयारी में हैं। दूसरे उम्मीदवार रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नथवानी हैं। दोनों ने 30 सितंबर को अपना-अपना नामांकन दाखिल किया था। उस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मौजूद रहे थे।
भाजपा ने उतारे आठ उम्मीदवार
दूसरी ओर भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी की सूची में दो महिला उम्मीदवारों को भी जगह मिली है। सामाजिक समीकरण साधते हुए भाजपा ने तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
16 अक्टूबर को होगा चुनाव
उत्तर प्रदेश की इन 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। ऐसे में सपा (SP) के तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने के संकेत के बाद राज्यसभा चुनाव का मुकाबला निर्विरोध परिणाम की ओर बढ़ता दिख रहा है।
दिल्ली मार्च में अखिलेश भी शामिल
इसी बीच मंगलवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन की ओर से मार्च निकाला गया, जिसमें अखिलेश यादव भी शामिल हुए। इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। कुछ अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
चुनाव आयोग पर अखिलेश का तीखा हमला
मार्च से पहले अखिलेश यादव (SP) ने चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। अखिलेश ने कहा कि आयोग मानता है कि भाजपा का सदस्य ही वोट डाल सकता है। उन्होंने बंगाल और उत्तर प्रदेश में बूथ लूटे जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि कितने चुनाव लूटे गए हैं।
आयोग पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप
अखिलेश यादव (SP) ने कहा कि चुनाव आयोग संविधान के तहत काम नहीं कर रहा है और वह निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग केवल भाजपा के लिए काम कर रहा है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को पार्टी कार्यालय बनाने के बजाय चुनाव आयोग के दफ्तर में ही एक फ्लोर ले लेना चाहिए था, क्योंकि काम वहीं से हो रहा है।
वन नेशन वन इलेक्शन पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने वन नेशन वन इलेक्शन की थ्योरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि चुनाव में घपले के आरोप बार-बार न लगें और एक ही बार में चुनाव कराकर भाजपा जीत सके। उनके इन बयानों के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा का तीसरा उम्मीदवार न उतारने का फैसला उत्तर प्रदेश (SP) की राजनीति में अगले बड़े मुकाबले की ओर संकेत कर रहा है।
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अब राज्यसभा की तीन सीटों की गणित से आगे अखिलेश यादव ने सीधे 403 विधानसभा सीटों को लक्ष्य बताते हुए सियासी फोकस बदलने का संकेत दिया है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का मौजूदा अध्याय भले ही निर्विरोध परिणाम की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों की लड़ाई अब राजनीतिक दलों के लिए अगली बड़ी परीक्षा बनने जा रही है।

