मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अदालत परिसर के बाहर और आसपास हुए राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस बीच, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत परिसर में राजनीतिक मार्च और प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को लेकर करीब 200 वकीलों ने चिंता जताते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत बाहर होने वाली गतिविधियों और बयानों (SIR) से अनजान नहीं है। उनकी टिप्पणी थी कि अदालत ‘हाथीदांत की मीनार’ में बैठकर काम नहीं कर रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि याचिका पर नोटिस जारी करने का अर्थ प्रदर्शन में शामिल नेताओं के आचरण को मंजूरी देना नहीं है। CJI ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता के आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
SIR पर विपक्षी नेताओं ने क्यों दायर की याचिका?
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग (SIR) की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है। उन्होंने प्रक्रिया की वैधानिकता और उसमें अपनाए जा रहे तरीकों की जांच की मांग की है।
याचिका में चुनाव आयोग के अधिकारों और उसके फैसलों को संविधान के अनुच्छेद 324 तथा संबंधित कानूनों के अनुरूप परखने की मांग की गई है।
याचिका में क्या हैं प्रमुख मांगें?
विपक्षी नेताओं की याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
- हटाए गए मतदाताओं (SIR) की बूथवार सूची और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक किए जाएं।
- पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच की जाए।
ये याचिकाकर्ताओं की मांगें हैं; इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
कई विपक्षी दलों के नेता याचिका में शामिल
इस मामले (SIR) में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत समेत विपक्ष के कई नेताओं ने अदालत का रुख किया है। रिपोर्टों के अनुसार, अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर समान याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किए गए हैं। अदालत ने संबंधित मामलों को साथ में सूचीबद्ध करने की बात कही है।
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SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद के बीच अब अदालत में इस प्रक्रिया की वैधानिकता, मतदाताओं के अधिकारों और पुनरीक्षण में अपनाए गए तरीकों पर सुनवाई होगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है; याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

