चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाया है। खरगे ने कहा कि “ज्ञानेश कुमार भाजपा का एजेंट था, है और रहेगा।” खरगे ने कहा कि विपक्ष बैलेट पेपर से मतदान की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
खरगे ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर चुनाव आयोग के ही दो अन्य आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के मुख्यमंत्री ज्ञानेश कुमार के काम का बचाव कर रहे हैं और सवाल किया कि मुख्यमंत्रियों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था संभालने की है या अधिकारियों का बचाव करने की।
19 दलों की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
बुधवार को INDIA गठबंधन के 19 दलों के नेताओं की बैठक हुई। बैठक में SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने देशभर में आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है।
इसके तहत 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और प्रदर्शन किए जाने हैं। वहीं, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों की ओर से चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की घोषणा की गई है। इसके अलावा विपक्ष ने पांच बड़ी रैलियां करने का भी ऐलान किया है।
INDIA गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई की मांग भी की है। विपक्षी दलों ने भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर (CEC) से कराने की मांग को भी अपने अभियान में शामिल किया है।
कांग्रेस ने कहा- चुनावी व्यवस्था पर कब्जे की कोशिश
गुरुवार को कांग्रेस ने चुनाव आयोग (CEC) और SIR के मुद्दे पर अपना हमला और तेज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि चुनावी व्यवस्था पर कब्जे के खिलाफ आवाज तेजी से उठ रही है और जनता कथित ‘वोट चोरी’ को स्वीकार नहीं करेगी।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के एक इंटरव्यू का हवाला दिया। रमेश के मुताबिक, रावत ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। रमेश ने रावत के हवाले से दावा किया कि आजादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के वोट प्रभावित हुए हैं।
रमेश ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के चलते करीब 14 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग (CEC) को लेकर कहा कि पहले उसकी विश्वसनीयता को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं। यह आंकड़ा और इसके आधार पर की गई राजनीतिक व्याख्या विपक्ष के दावे के रूप में सामने आई है।
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विपक्षी दलों ने EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को भी अपने संयुक्त अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची में पारदर्शिता, नाम हटाने की प्रक्रिया (CEC) में जवाबदेही और मतदाताओं को प्रभावी अपील का अधिकार देने जैसी मांगें भी उठाई हैं।

