धर्म और अध्यात्म की नगरी Kashi में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रशासन के अनुमान के अनुसार करीब दो लाख श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से काशी पहुंचे। गंगा घाटों से लेकर मठ, मंदिर और आश्रमों तक सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पूरे शहर में गुरु वंदना, भजन-कीर्तन, चरण पादुका पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल देखने को मिला।
आस्था की डुबकी लगाई और मां गंगा का किया पूजन
ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। दशाश्वमेध, अस्सी, राजेंद्र प्रसाद, पंचगंगा सहित प्रमुख घाटों पर लोगों ने गंगा (Kashi) में आस्था की डुबकी लगाई और मां गंगा का पूजन किया। स्नान के बाद श्रद्धालु अपने-अपने गुरुजनों, संतों और आध्यात्मिक आचार्यों के आश्रमों में पहुंचे, जहां विधि-विधान से गुरु पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शहर (Kashi) के विभिन्न मठों और आश्रमों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। चरण पादुका पूजन, वेद मंत्रों का उच्चारण, हवन, सत्संग और प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने अपने गुरुओं के चरणों में पुष्प, फल, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त की। कई स्थानों पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
Kashi को दे दिया लघु भारत का स्वरूप
काशी की गलियों, घाटों और मंदिरों में देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने शहर को लघु भारत का स्वरूप दे दिया। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक की विविध वेशभूषा, भाषाएं और सांस्कृतिक रंग एक साथ दिखाई दिए। विदेशी श्रद्धालुओं ने भी भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी आस्था जताते हुए धार्मिक आयोजनों में भाग लिया।
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गुरु पूर्णिमा (Kashi) के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की। प्रमुख घाटों, मंदिरों और आश्रमों के आसपास पुलिस बल तैनात रहा, जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं। पूरे दिन काशी में श्रद्धा, आस्था और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला।

