Varanasi: शहर की सड़कों पर रात का अंधेरा लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले दो वर्षों में जिले में सड़क हादसों में कुल 678 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश दुर्घटनाएं रात के समय हुईं। खासकर रात 10 बजे से लेकर भोर 2 बजे तक का समय सबसे अधिक घातक साबित हुआ है। इस अवधि को अब सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ “ब्लैक आवर” के रूप में देख रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार दिन की अपेक्षा रात में होने वाले हादसों में मौतों की संख्या दोगुनी से भी अधिक दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह दुर्घटना (Varanasi) के बाद समय पर सहायता और इलाज न मिल पाना है। दिन के समय हादसा होने पर राहगीर, पुलिस या एम्बुलेंस सेवा तुरंत सक्रिय हो जाती है, जबकि रात के सन्नाटे में कई बार दुर्घटनाओं की जानकारी घंटों बाद मिलती है।
36 मामलों में सुबह मिली हादसे की जानकारी
पिछले दो वर्षों में 36 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें दुर्घटना देर रात हुई लेकिन आसपास कोई मौजूद न होने के कारण लोगों को इसकी जानकारी सुबह हुई। परिणामस्वरूप घायल समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
रिपोर्ट के अनुसार कुल सड़क हादसों में करीब 65 प्रतिशत लोगों की मौत मौके पर ही हो गई। वहीं 12 प्रतिशत लोगों ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि 22 प्रतिशत घायलों (Varanasi) की मौत इलाज के दौरान हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में प्रभावी उपचार मिल जाए तो इनमें से कई जानें बचाई जा सकती थीं।
Varanasi: फ्लाईओवर भी बन रहे जानलेवा
शहर के फ्लाईओवरों पर सुरक्षा मानकों की कमी भी चिंता का विषय है। पिछले एक वर्ष में फ्लाईओवर से नीचे गिरकर तीन लोगों की मौत हो चुकी है। कई स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेतकों की कमी सामने आई है। ट्रैफिक विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रात (Varanasi) में होने वाले अधिकांश गंभीर हादसों में तेज रफ्तार और शराब पीकर वाहन चलाना प्रमुख कारण पाया गया है। रात के समय सड़कें अपेक्षाकृत खाली होने के कारण चालक वाहन की गति बढ़ा देते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
अस्पतालों में रात में बढ़ जाता है दबाव
स्वास्थ्य विभाग के(Varanasi) अपर निदेशक डॉ. एनडी शर्मा ने बताया कि रात 11 बजे से सुबह 2 बजे के बीच इमरजेंसी में सड़क दुर्घटना के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि रात में ड्यूटी करने वाली मेडिकल टीम को अलर्ट मोड पर रखा जाता है और वाराणसी ही नहीं, आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों का भी तत्काल उपचार किया जाता है।
आरटीओ प्रवर्तन मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि लोगों को राहवीर योजना के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्ययोजना (Varanasi) तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में हादसों को रोका जा सके।
सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों में कमी लाने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। वाहन चालकों को भी यातायात नियमों का पालन, निर्धारित गति सीमा का सम्मान और नशे में वाहन चलाने से बचना होगा। साथ ही दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
वाराणसी (Varanasi) में बढ़ते सड़क हादसों के ये आंकड़े प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सड़कों का यह ‘ब्लैक आवर’ आगे भी कई परिवारों की खुशियां छीनता रहेगा।
ये मार्ग बने हादसों के सबसे बड़े हॉटस्पॉट
वाराणसी (Varanasi) में राष्ट्रीय राजमार्ग और फोरलेन सड़कें हादसों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- एनएच-233 पांडेयपुर-आजमगढ़ मार्ग
- बाबतपुर फोरलेन
- एनएच-2 वाराणसी-चंदौली मार्ग
- एनएच-31 वाराणसी-गाजीपुर मार्ग
- रिंग रोड फेज-1
- रिंग रोड फेज-2
शामिल हैं। इन मार्गों पर तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है।

