Varanasi: काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले दान की गिनती और प्रबंधन को लेकर उठने वाले सवालों के बीच वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सार्वजनिक बताया है। उन्होंने कहा कि धाम परिसर में कुल 56 हुंडियाँ स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार दान करते हैं। इन हुंडियों को सप्ताह में दो दिन—मंगलवार और शुक्रवार—खोला जाता है और पूरी प्रक्रिया खुले वातावरण में सार्वजनिक रूप से संपन्न होती है।
राजलिंगम ने बताया कि दान राशि की गिनती मुख्य मंदिर परिसर के समीप स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर (Varanasi) के बरामदे में की जाती है। यह कोई बंद कमरा नहीं है, बल्कि ऐसा स्थान है जहां आम लोग भी पूरी प्रक्रिया को देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इच्छुक व्यक्ति मंगलवार या शुक्रवार को पहुंचकर स्वयं दान गिनती की प्रक्रिया का अवलोकन कर सकता है।
Varanasi: 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी
उन्होंने बताया कि पूरी व्यवस्था 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहती है। दान राशि की छंटनी और गिनती में स्थानीय नागरिक भी स्वेच्छा से सहयोग करते हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होती हैं। प्रत्येक बार लगभग 20 से 25 महिलाएं सेवा भाव से इस कार्य (Varanasi) में योगदान देती हैं। इसके अलावा एक सेवानिवृत्त प्रथम श्रेणी अधिकारी भी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं।
मंडलायुक्त ने कहा कि दान की गणना राजपत्रित अधिकारियों की उपस्थिति में की जाती है। बैंक कर्मी भी मौके पर मौजूद रहते हैं और गिनी गई राशि का मिलान कर उसे रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद रकम बैंक में जमा कराई जाती है तथा बैंक स्टेटमेंट के आधार पर दोबारा रजिस्टर से मिलान किया जाता है, जिससे किसी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता की संभावना नहीं रहती।
सरकारी खजाने में जमा कराया जाता है मूल्यवान धातु
सोने-चांदी जैसे बहुमूल्य दानों के संबंध में उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं को सलाह देता है कि वे ऐसे दान सीधे कार्यालय में जमा कर रसीद प्राप्त करें। हालांकि यदि हुंडियों में सोना या चांदी मिलता है तो उसे अलग कर विशेषज्ञों (Varanasi) द्वारा उसका मूल्यांकन कराया जाता है। मूल्यवान धातुओं को सरकारी खजाने में जमा कराया जाता है, जबकि अन्य धातुओं को सुरक्षित संरक्षित रखा जाता है।
राजलिंगम ने जोर देकर कहा कि दान प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित की जाती है। सीसीटीवी फुटेज, अधिकारियों की रिपोर्ट और बैंक रिकॉर्ड (Varanasi) के माध्यम से प्रत्येक चरण का सत्यापन संभव है, जिससे श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

