Varanasi: प्रधानमंत्री द्वारा सोना न खरीदने की अपील के विरोध में सोमवार को वाराणसी में स्वर्णकार समाज ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय पर शुभम सेठ “गोलू” के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्वर्णकारों, सर्राफा व्यापारियों और कारीगरों ने हाथों में झालमूरी के डिब्बे लेकर प्रतीकात्मक रूप से झालमूरी बेचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान स्वर्णकार समाज ने आरोप लगाया कि लगातार घटते कारोबार और बाजार में ग्राहकों की कमी से हजारों कारीगर परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि इसी तरह व्यापार प्रभावित होता रहा तो पारंपरिक स्वर्णकारी कला से जुड़े लोगों को अपना पुश्तैनी व्यवसाय छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा।
Varanasi: स्वर्ण व्यापार लाखों परिवारों की आजीविका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभम सेठ “गोलू” ने कहा कि स्वर्ण व्यापार केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बाजार में लगातार गिरावट आने से छोटे कारीगरों और दुकानदारों की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और सार्वजनिक बयानों का सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है। ऐसे में स्वर्णकार समाज (Varanasi) अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के लिए मजबूर है।
लोगों ने खरीदी झालमूरी, आंदोलन को मिला समर्थन
प्रदर्शन के दौरान शुभम सेठ द्वारा तैयार की गई झालमूरी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। बड़ी संख्या में लोगों ने झालमूरी खरीदकर स्वर्णकार समाज के आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन (Varanasi) सरकार को यह संदेश देने के लिए है कि यदि हालात नहीं बदले तो कारीगरों को छोटे-मोटे व्यवसाय अपनाने पड़ सकते हैं।
सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार की मांग
स्वर्णकार समाज (Varanasi) ने मांग की कि सरकार ऐसे बयानों और नीतियों पर पुनर्विचार करे, जिनसे स्वर्ण व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस उद्योग से लाखों परिवार जुड़े हैं, इसलिए व्यापार और कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में स्थानीय सर्राफा व्यापारियों, स्वर्ण कारीगरों और समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रमुख रूप से सूरज दयाल सेठ, किशन सेठ, मुकुंद सेठ, सुनीति सिंह, राज सेठ, विशाल सेठ, चेतन सोनी, विष्णु दयाल सेठ, सुजीत सेठ, संदीप सेठ, सुभाष सेठ और सुरेंद्र सेठ सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

