Delhi के जंतर-मंतर पर नीट धांधली के विरोध में 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने तड़के एक बेहद गोपनीय अभियान चलाया। दावा है कि पूरी कार्रवाई इतनी गुप्त रखी गई कि इसमें शामिल कई पुलिसकर्मियों को भी आखिरी समय तक असली मिशन की जानकारी नहीं थी और महज 30 सेकंड के भीतर वांगचुक को धरना स्थल से अस्पताल पहुंचा दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11 बजे नई दिल्ली (Delhi) जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने साथ 10-10 चुनिंदा पुलिसकर्मियों को लेकर शनिवार तड़के 3 बजे संसद मार्ग थाने पहुंचें। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि उन्हें संसद भवन परिसर में सुरक्षा संबंधी मॉक ड्रिल में हिस्सा लेना है। इस अभियान के लिए पहले से दो अतिरिक्त पुलिस कंपनियों को भी बैकअप के तौर पर तैयार रखा गया था।
आधी रात की बैठक में सामने आया असली मिशन
तड़के करीब 3 बजे पुलिस बल के संसद मार्ग थाने पहुंचने के बाद पूरे काफिले को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। वहां जिले के तीनों डीसीपी पहले से मौजूद थे और उन्होंने पहली बार पूरे अभियान की वास्तविक जानकारी दी। अधिकारियों ने पुलिस टीम (Delhi) को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक को सुरक्षित हटाना है और पूरी कार्रवाई 30 सेकंड के भीतर पूरी करनी होगी। इसके साथ ही धरना स्थल के आसपास से बैरिकेड हटाए गए और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
शौचालय जाने की तय समय-सारिणी पर शुरू हुआ ऑपरेशन
सूत्रों का कहना है कि अभियान के तहत एक एम्बुलेंस पहले से ही केरल भवन के पास खड़ी कर दी गई थी। जंतर-मंतर को दोनों ओर से पुलिस बल ने घेर लिया था। पुलिस को यह इनपुट मिला था कि आंदोलन से जुड़े नेता अभिजीत दीपके सुबह लगभग 7 बजे शौचालय जाने के लिए मंच से हटते हैं। जैसे ही वह समय आया, वरिष्ठ अधिकारियों (Delhi) ने कार्रवाई का संकेत दिया।

पुलिसकर्मी तेजी से मंच तक पहुंचे, स्ट्रेचर के साथ वांगचुक को मंच के पिछले हिस्से से नीचे लाया गया और तुरंत वाहन के जरिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। सूत्रों के मुताबिक, अभियान के दौरान किसी तरह की सूचना बाहर न जाए, इसके लिए इलाके में मोबाइल जैमर भी सक्रिय किए गए थे।
21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर (Delhi) पर पिछले 21 दिनों से नीट धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे थे। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग लगातार धरना स्थल पर मौजूद थे। वांगचुक को हटाए जाने के बाद वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य और अदालत के निर्देशों का दिया हवाला
घटना के बाद उठे सवालों पर नई दिल्ली जिले के डीसीपी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों और चिकित्सकों की सलाह के आधार पर की गई। पुलिस के अनुसार, लगातार 21 दिनों के अनशन की वजह से सोनम वांगचुक की तबीयत तेजी से बिगड़ रही थी और उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी था। इसी कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भी जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का विरोध जारी रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और धरना स्थल खाली करने की अपील की। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस (Delhi) की रणनीति, प्रदर्शन के अधिकार और स्वास्थ्य संबंधी प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है, जबकि आगे की स्थिति अब प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया और प्रशासन के अगले कदम पर निर्भर करेगी।
