Mau: तहसील के उत्तरी छोर पर बह रही घाघरा नदी इस सीजन में चौथी बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर रौद्र रूप में बह रही है। गुरुवार सुबह 8 बजे परसिया जयरामगिरी हाहा नाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 66.78 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरा बिंदु 66.31 मीटर से 47 सेमी ऊपर है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार महज 24 घंटे में 20 सेमी की भारी बढ़ोतरी हुई है।
बुधवार सुबह जलस्तर 66.58 मीटर था, जबकि इससे पहले सोमवार को 66.00 मीटर, मंगलवार को 66.28 मीटर और 11 सितंबर को 66.44 मीटर तक नदी पहुंची थी। जानकारों के अनुसार नेपाल और पहाड़ी इलाकों (Mau) में मूसलाधार बारिश के साथ बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन के कारण नदी में पानी का इनफ्लो अचानक बढ़ गया है।
1998 व 2022 में नदी के उफान से हुई तबाही याद आने लगी
लगातार बढ़ते जलस्तर से देवारा वासियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। लोगों को अक्टूबर 1998 की वह भयावह तबाही याद आ रही है, जब नदी का जलस्तर 67.47 मीटर तक पहुंच गया था और रिंग बांध टूटने से गजियापुर गांव क्षण भर में जलमग्न हो गया था। तब नदी (Mau) कटान की जद में आने से देवारा के पांचो पंडवा, केवटलिया, बिंदु बस्ती समेत पांच पुरवों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था।
टूट सकता है पुराना रिकॉर्ड
इसके बाद घाघरा ने 15 अक्टूबर 2022 को 3 सेमी की बढ़त के साथ 1998 का रिकॉर्ड तोड़कर 67.50 मीटर तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाकर शांत हुई थी। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो दोबारा वैसी ही तबाही मच सकती है।
उफनती लहरों ने क्षेत्र (Mau) के चक्की मूसाडोही, बिंदटोलिया, जरलहवा, धूस, बैरिकंटा, सुन्नर का पुरा, नंदजी का पुरा, हाता, बिंदर का पुरा, मनमन का पुरा, हरिलाल का पुरा और खैरा सहित दर्जन भर गांवों को पूरी तरह टापू में तब्दील कर दिया है। संपर्क मार्ग डूबने लगे हैं, धान की फसल पानी में विलीन हो रही है और मवेशियों के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
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ग्रामीणों (Mau) के आवागमन के लिए अब नाव ही एकमात्र सहारा बची है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिन में जलस्तर स्थिर हो सकता है, लेकिन इसका कोई पुख्ता दावा नहीं किया गया है।

