सावन शुरू होते ही Varanasi में ज्ञानवापी परिसर को लेकर एक बार फिर नई मांग सामने आई है। शिव सेना ने प्रशासन को ज्ञापन देकर सावन माह के दौरान परिसर में नमाज पर रोक लगाने और बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में स्पर्श दर्शन की अनुमति बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अपनी मांग को धार्मिक परंपरा, समानता और कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए प्रशासन से इस पर विचार करने का अनुरोध किया है।
शुक्रवार को अजय चौबे के नेतृत्व में शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने मंदिर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है और इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में शिवभक्त तथा कांवड़िए वाराणसी पहुंचते हैं। संगठन का कहना है कि इसी कारण पूरे सावन माह में ज्ञानवापी परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
Varanasi: समानता का हवाला देकर रखी दलील
शिव सेना (Varanasi) ने अपने ज्ञापन में समानता का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का कहना है कि माता श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और पूजन की अनुमति नहीं है तथा वर्ष में केवल एक निर्धारित अवसर पर ही पूजा होती है। ऐसे में सावन के दौरान ज्ञानवापी परिसर में नमाज पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि सभी पक्षों के लिए समान व्यवस्था लागू हो।
धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था का दिया तर्क
ज्ञापन में संगठन ने दावा किया है कि सावन के दौरान ज्ञानवापी परिसर (Varanasi) में सामूहिक रूप से नमाज अदा किए जाने से शिवभक्तों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं। संगठन का कहना है कि इससे तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका भी बनी रहती है। इसी आधार पर प्रशासन से शांति, कानून-व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया गया है।
गर्भगृह में स्पर्श दर्शन की अनुमति बहाल करने की मांग
शिव सेना ने अपने ज्ञापन में बाबा विश्वनाथ मंदिर (Varanasi) के गर्भगृह में स्पर्श दर्शन का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का कहना है कि परंपरागत रूप से सावन के दूसरे शुक्रवार को कार सेवा के बाद शिव सेना के कार्यकर्ता बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में जाकर स्पर्श दर्शन और पूजन करते रहे हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।
शिव सेना ने प्रशासन से मांग की है कि पूर्व में लागू व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए और कार सेवा के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं को गर्भगृह में स्पर्श दर्शन तथा पूजन की अनुमति दी जाए। फिलहाल संगठन का ज्ञापन प्रशासन के समक्ष है और उसकी मांगों (Varanasi) पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। सावन के दौरान धार्मिक आस्था, परंपरा और कानून-व्यवस्था से जुड़े इस मुद्दे पर प्रशासन का रुख आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण माना जाएगा।


