Varanasi: संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती को भारतीय जनता पार्टी इस बार केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और संगठन विस्तार के राष्ट्रीय अभियान के रूप में मनाने जा रही है। इसकी शुरुआत गुरु पूर्णिमा से होगी और माघी पूर्णिमा तक देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का शुभारंभ वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित गुरु रविदास की जन्मस्थली से होगा, जहां से 131 कलशों में भरी पवित्र मिट्टी पूरे देश के राज्यों, संगठनात्मक जोनों और जिलों तक भेजी जाएगी।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले लगभग ढाई दशकों का इतिहास बताता है कि सीर गोवर्धनपुर स्थित रविदास जन्मस्थली (Varanasi) हर बड़े चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बन जाती है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता चुनावी वर्षों में यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते रहे हैं।
29 जुलाई को होगा भव्य कलश पूजन
भाजपा की ओर से 29 जुलाई को जन्मस्थली परिसर (Varanasi) में भव्य कलश पूजन, आरती और संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संत समाज के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
इसके अगले दिन 30 जुलाई को 131 कलश विशेष रूप से तैयार किए गए वाहनों के माध्यम से पूरे देश के लिए रवाना किए जाएंगे। इन कलशों में भरी जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी विभिन्न राज्यों और जिलों तक पहुंचेगी, जहां गुरु रविदास की जयंती के अवसर पर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
Varanasi: 131 कलशों से देशभर में पहुंचेगा संदेश
भाजपा की योजना के अनुसार तैयार किए गए 131 कलशों में—
- उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों
- देश के 27 राज्यों
- भाजपा के 6 संगठनात्मक जोन
को शामिल किया गया है।
इन कलशों के माध्यम से गुरु रविदास (Varanasi) के समता, मानवता, सामाजिक न्याय और सद्भाव के संदेश को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाने का अभियान चलाया जाएगा।
सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रही, बल्कि समय के साथ यह राष्ट्रीय राजनीति का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन गई है। खासकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले यहां देश के बड़े राजनीतिक नेताओं का पहुंचना एक परंपरा जैसा बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित समाज और रविदासिया समुदाय के बीच गुरु रविदास (Varanasi) की गहरी आस्था होने के कारण यह स्थल सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यही कारण है कि चुनावी वर्षों में विभिन्न दलों के शीर्ष नेता यहां आकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश देने का प्रयास करते हैं।
2022 में सबसे अधिक रही राजनीतिक सक्रियता
साल 2022 में उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान यह जन्मस्थली राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बनी रही। उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तथा आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह यहां पहुंचे थे।
उस चुनाव में उत्तर प्रदेश और पंजाब दोनों राज्यों में दलित मतदाताओं (Varanasi) की निर्णायक भूमिका मानी जा रही थी, इसलिए सभी प्रमुख दलों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
लोकसभा चुनावों में भी बना रहा केंद्र
- लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के दौरान भी सीर गोवर्धनपुर लगातार राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा।
- 2023 में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जन्मस्थली पहुंचे।
- 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2016 और 2019 में यहां आ चुके हैं, जबकि बसपा प्रमुख मायावती 2008 में जन्मस्थली पहुंची थीं।
उत्तर प्रदेश से बाहर भी व्यापक प्रभाव
गुरु रविदास (Varanasi) का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में रविदासिया समाज और अनुसूचित जाति समुदाय के बीच उनकी गहरी आस्था है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इन राज्यों से सीर गोवर्धनपुर पहुंचते हैं। इसी व्यापक सामाजिक प्रभाव के कारण यह जन्मस्थली राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखती है।
दो दशक में जन्मस्थली पहुंचे प्रमुख नेता
- 2008 – मायावती
- 2016 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- 2019 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- 2021 – अखिलेश यादव
- 2022 – योगी आदित्यनाथ, मायावती, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, चरणजीत सिंह चन्नी, संजय सिंह
- 2023 – धर्मेंद्र प्रधान, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी
- 2024 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल
चुनाव और राजनीतिक संदेश
- 2008–09: बसपा ने दलित सामाजिक आधार मजबूत करने का संदेश दिया।
- 2016–17: भाजपा ने गैर-जाटव दलित समाज और संत परंपरा से जुड़ाव की रणनीति पर जोर दिया।
- 2019: लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दलित समर्थन बनाए रखने का प्रयास किया।
- 2021–22: समाजवादी पार्टी ने दलित समाज तक अपनी राजनीतिक पहुंच का संदेश दिया।
- 2024: भाजपा, आम आदमी पार्टी समेत विभिन्न दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर सामाजिक जुड़ाव का संदेश दिया।
तैयारियों का लिया जायजा
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को सीर गोवर्धनपुर स्थित गुरु रविदास मंदिर पहुंचकर जन्मस्थली पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने 29 जुलाई को होने वाले मुख्य कार्यक्रम (Varanasi) की तैयारियों का निरीक्षण किया तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी दी।
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धर्मपाल सिंह ने कहा कि “गुरु रविदास (Varanasi) की अमृतवाणी केवल एक समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए प्रेरणा है। उनके समता, मानवता, सद्भाव और सामाजिक समरसता के संदेश को आत्मसात करना ही उनकी जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाला यह अभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुरु रविदास के विचारों को पहुंचाने का माध्यम बनेगा और सामाजिक समरसता को नई मजबूती देगा।

