UPI पेमेंट्स को लेकर देश भर में चर्चाएं तेज हैं। 0.4% MDR चार्ज को लेकर जहाँ व्यपारियों में आक्रोश हैं वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसको लेकर बड़ा एक्शन लिया हैं। UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
इस दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और इस नोटिस में चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिए।

सुप्रीम कोर्ट का एक्शन
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामला कानूनी से अधिक तकनीकी है। और केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नए फ्रेमवर्क के तहत UPI पेमेंट गेटवे के जरिए होने वाले करीब 96 फीसदी ट्रांजैक्शन शुल्क से बाहर रहेंगे। आवश्यक सेवाओं के लिए MDR को 5 रुपये तक सीमित किया जाएगा।

संवैधानिक वैधता को दी चुनौती
आपको बतादें कि अधिवक्ता अंजन दत्ता की याचिका में आरोप लगाया गया है कि पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना यह शुल्क लगाया गया है। जो की भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती डेटा हैं। इसमें कहा गया है कि यह प्रावधान बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के कार्यपालिका को यह अधिकार देता है कि कौन सा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क मुक्त रहेगा।
बता दें कि 15 अक्टूबर से केंद्र सरकार ने नए फ्रेमवर्क के तहत सामान्य पर्सन टू मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लगाने का फैसला लिया है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
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रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदान जैसे आवश्यक तथा कम ‘मार्जिन’ वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय एमडीआर होगा। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर तथा डीलर के जरिये किए जाने वाले भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।

