Varanasi: लक्ष्मीकुंड में शनिवार को 16 दिवसीय जिउतिया व्रत का समापन श्रद्धा और आस्था के बीच हुआ। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना लेकर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही कुंड पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी। हाथों में पूजा की थाली, माथे पर सिंदूर और सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं मंडपों में पहुंचीं और विधि-विधान से जिउतिया माता की पूजा-अर्चना की।
लक्ष्मीकुंड परिसर में जगह-जगह मंडप सजाए गए थे। महिलाओं ने मंडप में बैठकर सामूहिक रूप से पूजा-पाठ किया और जिउतिया व्रत की कथा सुनी। कथा के दौरान संतान की रक्षा और उनके दीर्घायु होने की कामना की गई। पूजा के दौरान महिलाओं ने जिउतिया माता को पूजन सामग्री अर्पित की और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। निर्जला व्रत होने के बावजूद महिलाओं में उत्साह नजर आया।
सुबह से कुंडों और आसपास का इलाका महिलाओं की भीड़ से गुलजार रहा। दूर-दराज से भी महिलाएं परिवार के साथ यहां पहुंचीं। पूजा के लिए बनाए गए मंडपों में कथा और पूजन का सिलसिला चलता रहा।
काशी (Varanasi) में जिउतिया व्रत की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लक्ष्मीकुंड, इश्वर गंगी, राम कुंड सहेत शेहर के विभिन कुंडों और तालाबों तक आयोजन काशी की पारंपरिक लोक आस्था और संस्कृति से जुड़ा प्रमुख आयोजन माना जाता है। इसे काशी (Varanasi) के लक्खा मेले की परंपरा में भी गिना जाता है। आधुनिक दौर में भी महिलाएं इस परंपरा को उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभा रही हैं। 16 दिवसीय व्रत के समापन पर लक्ष्मीकुंड में आस्था के साथ काशी की लोक संस्कृति और परंपरा की अनूठी तस्वीर दिखाई दी।
अन्न-जल का त्याग कर रखती है व्रत
जितिया व्रत की सबसे प्रमुख विशेषता इसका कठिन और निराजल स्वरूप है। (Varanasi) व्रती महिलाएं निर्धारित समय से अन्न-जल का त्याग कर व्रत रखती हैं। करीब 24 घंटे तक चलने वाले इस व्रत में कई महिलाएं पानी तक ग्रहण नहीं करती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं संतान की मंगलकामना करती हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। व्रत के समापन पर पारंपरिक तरीके से पूजा करने के बाद महिलाएं पारण करती हैं।

पर्व को लेकर (Varanasi) शहर के विभिन्न इलाकों के अलावा ग्रामीण बाजारों में भी फल विक्रेताओं ने दुकानें सजा ली हैं। दुकानदारों ने अलग-अलग प्रकार के फल मंगाकर बिक्री के लिए रखे हैं। व्रत के कारण फलों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गई है। परिवार के सदस्य भी अपनी माताओं के लिए फल और पूजन सामग्री की खरीदारी करते नजर आ रहे हैं।
संतान के सुख और दीर्घायु की कामना का है पर्व
ग्रामीण क्षेत्रों में जितिया पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। (Varanasi) कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर फल और पूजन सामग्री की अस्थायी दुकानें भी लगाई गई हैं। महिलाओं का कहना है कि संतान के सुख और दीर्घायु की कामना से रखा जाने वाला यह व्रत उनके लिए आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है।

जितिया केवल एक धार्मिकवाराणसी। संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना को लेकर मनाए जाने वाले जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर वाराणसी (Varanasi) में तैयारियां तेज हैं। पर्व से पहले शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फल बाजार सज गए हैं। जगह-जगह फलों की दुकानें लग गई हैं और माताएं व्रत के लिए आवश्यक पूजन सामग्री और फल खरीदने में जुटी हैं। बाजारों में सुबह से ही खरीदारों की भीड़ देखने को मिल रही है।

Varanasi: जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से जाना जाता है यह पर्व
पर्व को लेकर शहर के (Varanasi) विभिन्न इलाकों के अलावा ग्रामीण बाजारों में भी फल विक्रेताओं ने दुकानें सजा ली हैं। दुकानदारों ने अलग-अलग प्रकार के फल मंगाकर बिक्री के लिए रखे हैं। व्रत के कारण फलों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गई है। परिवार के सदस्य भी अपनी माताओं के लिए फल और पूजन सामग्री की खरीदारी करते नजर आ रहे हैं।
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जितिया केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि माताओं की संतान के प्रति ममता, समर्पण और आस्था से जुड़ा पर्व भी माना जाता है। यही कारण है कि पर्व के नजदीक आते ही घरों से लेकर बाजार तक इसकी तैयारियों का माहौल दिखाई देने लगा है। अनुष्ठान नहीं, बल्कि माताओं की संतान के प्रति ममता, समर्पण और आस्था से जुड़ा पर्व भी माना जाता है। यही कारण है कि पर्व के नजदीक आते ही घरों से लेकर बाजार तक इसकी तैयारियों का माहौल दिखाई देने लगा है।

