Kashi का प्रसिद्ध अस्सी घाट इन दिनों जलकुंभी के बढ़ते फैलाव से जूझ रहा है। गंगा की सतह पर दूर-दूर तक फैली जलकुंभी ने घाट की प्राकृतिक सुंदरता को प्रभावित कर दिया है। हर दिन यहां आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय नागरिक इस स्थिति को देखकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं और गंगा की सफाई के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अस्सी घाट वाराणसी के सबसे व्यस्त और प्रसिद्ध घाटों में शामिल है। यहां प्रतिदिन हजारों लोग गंगा स्नान, पूजा-पाठ और आराधना के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा, हर सुबह आयोजित होने वाला ‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम (Kashi) देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है। लेकिन गंगा की सतह पर फैली जलकुंभी अब इस ऐतिहासिक घाट की खूबसूरती को फीका करती दिखाई दे रही है।
Kashi: नाविकों की रोजी-रोटी पर भी असर
घाट से जुड़े नाविकों का कहना है कि यदि जलकुंभी का फैलाव इसी तरह बढ़ता रहा तो नावों का संचालन प्रभावित हो सकता है। कई स्थानों पर जलकुंभी की मोटी (Kashi) परत बनने से नावों के आवागमन में परेशानी होती है। यदि समय रहते इसकी सफाई नहीं हुई तो इसका असर पर्यटन कारोबार के साथ-साथ नाविकों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव केवल सौंदर्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गंगा (Kashi) के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी नुकसानदायक है। यह जल के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करती है और पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है। इससे मछलियों समेत अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ सकता है।
चंदौली: गंगा पुल से कूदे दो गोवंश तस्कर, इलाज के दौरान एक की मौत, दूसरा गंभीर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल एक बार सफाई अभियान च(Kashi) लाना पर्याप्त नहीं होगा। गंगा में जलकुंभी की नियमित निगरानी और समय-समय पर मशीनों की मदद से सफाई कराना जरूरी है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाएं, तो समस्या को दोबारा गंभीर होने से रोका जा सकता है।

